आइये जाने क्या हैं ज्योतिष और उसकी अन्य शाखाएं
हमारा भारतीय ज्योातिष विषय वेदों जितना ही प्राचीन है। प्राचीन काल में ग्रह, नक्षत्र और अन्यज खगोलीय पिण्डों का अध्यायन करने के विषय को ही ज्योोतिष कहा गया था। इसके गणित भाग के बारे में तो बहुत स्पsष्टनता से कहा जा सकता है कि इसके बारे में वेदों में स्पषष्ट। गणनाएं दी हुई हैं। फलित भाग के बारे में बहुत बाद में जानकारी मिलती है। भारतीय आचार्यों द्वारा रचित ज्योतिष की पाण्डुलिपियों की संख्या एक लाख से भी अधिक है। ‘ज्योतिष’ से निम्नलिखित का बोध हो सकता है- 1 वेदांग ज्योतिष 2 सिद्धान्त ज्योतिष या ‘गणित ज्योतिष’ 3 फलित ज्योतिष 4 अंक ज्योतिष 5 खगोल शास्त्र 1 वेदाङ्ग ज्योतिष एक प्राचीन ज्योतिष ग्रन्थ है। इसका काल १३५० ई पू माना जाता है। अतः यह संसार का ही सर्वप्राचीन ज्याेतिष ग्रन्थ माना जा सकता है। यह ज्योतिष का आधार ग्रन्थ है। वेदाङ्गज्योतिष कालविज्ञापक शास्त्र है। माना जाता है कि ठीक तिथि नक्षत्र पर किये गये यज्ञादि कार्य फल देते हैं अन्यथा नहीं। कहा गया है कि- वेदा हि यज्ञार्थमभिप्रवृत्ताः कालानुपूर्वा विहिताश्च यज्ञाः। तस्मादिदं कालविधानशास्त्रं यो ज्येत...